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विश्व विद्यार्थी दिवस पर निबंध – World Student’s Day Eassy in Hindi

विश्व विद्यार्थी दिवस पर निबंध - World Student’s Day Eassy in Hindi

विश्व विद्यार्थी दिवस 2020 : हर साल 15 अक्टूबर को विश्व विद्यार्थी दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन पूर्व भारतीय राष्ट्रपति और महान वैज्ञानिक, डॉ। एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती का प्रतीक है।संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने 15 अक्टूबर, डॉ। एपीजे अब्दुल कलाम के जन्मदिन को 2010 में विश्व छात्र दिवस के रूप में घोषित किया। तब से, यह दिन दुनिया भर में 15 अक्टूबर को मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र ने कलाम के प्यार और शिक्षा, शिक्षण, छात्रों के प्रति समर्पण और शिक्षा को बढ़ावा देने में उनके ध्यान और प्रयासों को सम्मानित करने का दिन घोषित किया। डॉ। एपीजे अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को रामेश्वरम, तमिलनाडु, भारत में हुआ था। 2002-2007 तक, उन्होंने भारत के 11 वें राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया। वह एक एयरोस्पेस वैज्ञानिक थे। कलाम ने 1998 में पोखरण -2 परमाणु परीक्षणों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसने उन्हें भारत का मिसाइल मैन का खिताब दिलाया। आज में आपके साथ इस पोस्टविश्व विद्यार्थी दिवस पर निबंध – World Student’s Day Eassy in Hindi के माध्यम से विश्व विद्यार्थी दिवस पर निबंध साँझा कर रहा हु |

 विश्व विद्यार्थी दिवस पर निबंध

15 अक्टूबर ए.पी.जे अब्दुल कलाम निबंध

सन् 2010 में संयुक्त राष्ट्र ने प्रत्येक वर्ष 15 अक्टूबर के दिन भारत के पूर्व राष्ट्रपति अवुल पाकिर जैन अब्दुलीन अब्दुल कलाम (डॉ ए.पी.जे अब्दुल कलाम) के जन्म दिवस के दिन मनाने की घोषणा की, यह फैसला उनके द्वारा विज्ञान और तकनीक में गये योगदान को देखते हुए लिया गया। डॉ एपीजे अब्दुल कलाम एक वैज्ञानिक तथा राजनेता होने के साथ ही एक उम्दा शिक्षक भी थे। यहीं कारण था कि अपने भाषणों द्वारा उन्होंने लाखो छात्रों प्रभावित किया।डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम सभी विद्यार्थियों के लिए एक आदर्श थे, तमिलानाडु के एक छोटे से गाँव से होते हुए भी वह अपने मेहनत और लगन के बलबूते पर देश के सबसे उंचे संवैधानिक पद पर पहुंचे। उनके इन्हीं उपलब्धियों के कारण उनके जन्मदिन को विश्व विद्यार्थी दिवस के रुप में मनाने की घोषणा की गई है।

विश्व विद्यार्थी दिवस 15 अक्टूबर के दिन मनाया जाता है। इस वर्ष सन् 2019 में विश्व विद्यार्थी दिवस 15 अक्टूबर, मंगलवार के दिन मनाया जायेगा।

विश्व विद्यार्थी दिवस की घोषणा सोमवार 15 अक्टूबर के दिन की गई थी। सभी राजनैतिक पार्टियों के हर उम्र के नेताओं ने भारत के इस सबसे महान नेता भावभीनी श्रद्धांजलि प्रदान की। इस दौरान उनके सम्मान में स्कूल और कॉलेजो में कई सारे कार्यक्रम भी आयोजित किये गये। उन्हें याद करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि डॉ ए.पी.जे अब्दुल कलाम एक शिक्षक, अच्छे प्रेरक और एक उम्दा वैज्ञानिक थे, जोकि हर एक भारतीय के हृदय में बसते हैं। डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम सभी वर्गों और जाति के छात्रों के लिए एक प्रेरक और मार्गदर्शक की भूमिका निभाते थे। एक छात्र के रुप में उनका खुद का जीवन काफी चुनौतीपूर्ण था, और अपने जीवन में उन्होंने कई तरह के कठिनाइयों और चुनौतियों का सामना किया। इसके अलावा अपने बचपन में वह अपने परिवार और खुद के पालन-पोषण के लिए, वह दरवाजे-दरवाजे जाकर अखबार भी बेचा करते थे। लेकिन अपनी पढ़ाई के प्रति अपनी दृढ़-इच्छा शक्ति के कारण वह अपने जीवन में हर तरह की बाधाओं को पार करने में सफल रहे और अपने जीवन में हर चुनौती को पार करते हुए, राष्ट्रपति जैसे भारत के सबसे बड़े संवैधानिक को प्राप्त किया। यह उनके जीवन की ऐसी कहानी है, जो उनके साथ-साथ भारत के आने वाले कई पीढ़ीयों को प्रेरित करने का कार्य करेगी।

 विश्व विद्यार्थी दिवस पर निबंध

अपने वैज्ञानिक और राजनैकित जीवन के दौरान भी डॉ ए.पी.जे अब्दुल कलाम ने खुद को एक शिक्षक ही माना और छात्रों को संबोधित करना ही उनका सबसे प्रिय कार्य था। फिर चाहे वह किसी गांव के छात्र हों या फिर किसी बड़े कालेज या विश्वविध्यालय का छात्र हों। शिक्षण के प्रति उनका कुछ ऐसा रुझान था कि एक समय उन्होंने अपने जीवन में भारत सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार के जैसा कैबिनेट श्रेणी का पद छोड़कर एक शिक्षक का पद चुन लिया। अपने जीवन में डॉ कलाम ने छात्रों के कई सारे वैज्ञानिक, अकादमिक और आध्यात्मिक तरक्की पर ध्यान दिया। इस दौरान उन्होंने कई सारे भाषण दिये और किताबें लिखी तथा विश्व भर के छात्रों के तरक्की पर ध्यान दिया। उनके द्वारा वैज्ञानिक क्षेत्र और छात्रों के तरक्की के लिए किये गये इन्हीं अतुलनीय कार्यों देखते हुए उनके जन्म दिन को विश्व विद्यार्थी दिवस के रुप में मनाने का फैसला किया गया।

15 अक्टूबर विश्व विद्यार्थी दिवस पर निबंध

विश्व विद्यार्थी दिवस को मनाना हमारे लिए काफी महत्व की बात है क्योंकि इसके द्वारा हमें कई महत्वपूर्ण सीखें मिलती है। एक विद्यार्थी के लिए यह दिन और भी ज्यादे महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि डॉ ए.पी.जे अब्दुल कलाम का जीवन हमें इस बात की सीख देता है कि, जीवन में चाहे कितनी भी चुनौतियां क्यों ना हो लेकिन शिक्षा द्वारा हम हर बाधाओं को पार करते हुए बड़े से बड़े लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं। विश्व विद्यार्थी दिवस भारत के सभी विद्यालयों और कालेजों में मनाया जाता है और इनमें डॉ ए.पी.जे अब्दुल कलाम के नजरियों द्वारा समाज को तरक्की के ओर अग्रसित करने का प्रयास किया गया है। उनका मानना था कि छात्र देश के भविष्य है और यदि उनकी अच्छी से देख-रेख की जाये तो वह समाज में कई सारे क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकते हैं।

उन्होंने पढ़ाई-लिखाई को तरक्की का साधन बताया और उनका मानना था कि केवल इसके द्वारा ही हम अपने जीवन से गरीबी, निरक्षरता और कुपोषण जैसी समस्याओं को दूर कर सकते हैं। उनके इन महान विचारों ने देश के लाखों लोगों को प्रेरित करने और देश के लोकतंत्र को मजबूती प्रदान करने का कार्य किया है। इसके अलावा विद्यालयों में चाहे वह भाषण हो, या फिर निबंध लेखन प्रतियोगिताएं हो सभी में उनके महत्वपूर्ण और प्रसिद्ध कथनों को युवाओं को प्रेरित करने के लिए अवश्य ही दोहराया जाता है। इसके अलावा भारत के मिसाइल मैन के नाम से जाने वाले ए.पी.जे अब्दुल के सम्मान में इस दिन कई जगहों पर विज्ञान प्रदर्शनी का भी आयोजन किया जाता है।

 विश्व विद्यार्थी दिवस पर निबंध

यह सही ही कहा गया है कि छात्र और युवक डॉ कलाम के हर भाषण को बहुत ही ध्यान से सुनते थे। उनके छात्रों के प्रति प्रेम के कारण ही छात्र उनसे इतना ज्यादे प्रेम करते है तथा उनके जन्मदिन को विश्व विद्यार्थी दिवस के रुप में मनाते है। किसी भी कार्यक्रम के थीम का संदेश ही वह वस्तु है जो लोगो के दिमाग में कई दिनों तक टिका रहता है। विश्व विद्यार्थी दिवस से जुड़े ऐसे कई सारे थीम है जो लोगों को प्रेरणा देने का कार्य करते है। हालांकि अभी विश्व विद्यार्थी दिवस से जुड़ी कोई भी थीम ज्ञात नही है, जैसे ही इस विषय में कोई नई जानकारी प्राप्त होगी, हम इसे अपने वेबसाइट पर अपडेट कर देंगे।
वर्तमान में कई लोग इस विषय पर चर्चा कर रहे है कि विश्व विद्यार्थी दिवस को एक थीम के साथ मनाना चाहिए। हो सकता है भविष्य में ऐसा देखने को मिले और लोग थीम आधारित विश्व विद्यार्थी दिवस मनायें, जो कि लोगों में जागरुकता लाने और उन्हें सामाजिक संदेश देने का कार्य करेगा।

इसमें कोई संदेह नही है कि अब्दुल पाकिर जैनुलाब्दीन कलाम सच्चे मायनों में एक महानायक थे। जिस तरह की कठिनाइयां उन्होंने अपने बचपन में झेली, किसी और व्यक्ति को वह काफी आसानी से अपने रास्ते से डिगा सकती थी। पर डॉ अब्दुल कलाम इन सब कठिनाइयों का सामना शिक्षा के अस्त्र से किया और भारत के राष्ट्रपति जैसे सम्मानित पद को प्राप्त किया। डॉ अब्दुल कलाम के विषय में की गई कोई चर्चा तब तक नही पूरी होगी जबतक उनके धर्म निरपेक्ष चरित्र की बात ना की जाये, जिसका उन्होंने सदैव अपने जीवन में पालन किया। वह एक साधरण, धर्म निरपेक्ष, शांत व्यक्ति थे और उनका व्यवहार बिल्कुल सामान्य व्यक्तियों के तरह ही था। इसके साथ ही देश के विज्ञान तथा रक्षा क्षेत्र में उनका दिया गया योगदान हम सबके लिए सदैव ही एक प्रेरक विषय रहेगा।

World Student’s Day Eassy in Hindi 2020

विद्‌यार्थी जीवन मानव जीवन का स्वर्णिम काल होता है । जीवन के इस पड़ाव पर वह जो भी सीखता, समझता है अथवा जिन नैतिक गुणों को अपनाता है वही उसके व्यक्तित्व व चरित्र निर्माण में प्रमुख भूमिका निभाते हैं. दूसरे शब्दों में, हम कह सकते हैं कि विद्‌यार्थी जीवन मानव जीवन की आधारशिला है । इस काल में सामान्यत: विद्‌यार्थी सांसारिक दायित्वों से मुक्त होता है फिर भी उसे अनेक दायित्वों व कर्तव्यों का निर्वाह करना पड़ता है. प्रत्येक विद्‌यार्थी का अपने माता-पिता के प्रति यह पुनीत कर्तव्य बनता है कि वह सदैव उनका सम्मान करे । सभी माता-पिता यही चाहते हैं कि उनका पुत्र बड़ा हौकर उनका नाम ऊँचा करे । वह बड़े होकर उत्तम स्वास्थ्य, धन व यश आदि की प्राप्ति करे ।

World Student’s Day Eassy in Hindi

इसके लिए वे सदैव अनेक प्रकार के त्याग करते हैं । इन परिस्थितियों में विद्‌यार्थी का यह दायित्व बनता है कि वह पूरी लगन और परिश्रम सै अध्ययन करे तथा अच्छे अंक प्राप्त करें व अच्छा चरित्र धारण करने का प्रयत्न करे, अपने गुरुओं, शिक्षकों अथवा शिक्षिकाओं के प्रति विद्‌यार्थी का परम कर्तव्य है कि वह सभी का आदर करे तथा वे जो भी पाठ पढ़ाते हैं वह उसे ध्यानपूर्वक सुने तथा आत्मसात् करे । वे जो भी कार्य करने के लिए कहते हैं उसे तुरंत ही पूर्ण करने की चेष्टा करे । गुरु का उचित मार्गदर्शन विद्‌यार्थी को महानता के शिखर की ओर ले जाने में सक्षम है. विद्‌यार्थी का अपने विद्‌यालय के प्रति भी दायित्व बनता है । उसे अपने विद्‌यालय को उन्नत बनाने में यथासंभव योगदान करना चाहिए । विद्‌यालय को स्वच्छ रखने में मदद करे तथा अपने अन्य सहपाठियों को भी विद्‌यालय की स्वच्छता बनाए रखने हेतु प्रेरित करे । इसके अतिरिक्त वह कभी भी उन तत्वों का समर्थन न करे जो विद्‌यालय की गरिमा एवं उसकी संपत्ति को किसी भी प्रकार से हानि पहुँचाते हैं । वह विद्‌यार्थी जो विध्वंसक कार्यों में विशेष रुचि लेता है, उसे विद्‌यार्थी कहना ही उचित नहीं है ।

अपने सहपाठियों के साथ मृदुल व्यवहार रखना भी विद्‌यार्थी का परम कर्तव्य है । यह आवश्यक है कि वह किसी भी अन्य विद्‌यार्थी के साथ ईर्षा, द्‌वेष अथवा कटुता जैसी भावनाओं को न पनपने दे । यदि किन्हीं परिस्थितियों में इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न होती है तो आपस में विचार करके अथवा अपने गुरुजन की सहायता से इस समस्या का हल निकालने का प्रयास करे, आर्थिक रूप से जो विद्‌यार्थी सक्षम नहीं हैं, जिसके कारण वे अपनी पढ़ाई जारी नहीं रख पा रहे हैं तथा वे छात्र जो पढ़ाई में अत्यधिक कमजोर हैं उन छात्रों की यथासंभव सहायता करना भी विद्‌यार्थी का पुनीत कर्तव्य है ।
उपर्युक्त समस्त कर्तव्यों व दायित्वों के अतिरिक्त विद्‌यार्थी के लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण यह है कि वह आत्मविकास हेतु अपनी समस्त ऊर्जा को केंद्रित करे । विद्‌यार्थी जीवनकाल उसके लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है । इस काल में वह जितना अधिक परिश्रम करेगा शेष जीवन उसके लिए उतना ही सुखमय एवं आसान होगा । इसके लिए आवश्यक है कि वह समय के महत्व को समझे तथा अपने लक्ष्य की प्राप्ति हेतु पूर्ण प्रयास करे । वह सदैव कुसंगति से बचे । कुसंगति के चक्रव्यूह में उलझ जाने पर विद्‌यार्थी अपने लक्ष्य से बहुत पीछे रह जाता है ।

World Student’s Day Eassy in Hindi

विद्‌यार्थी के लिए पुस्तकों के ज्ञान के अतिरिक्त यह भी आवश्यक है कि वह व्यायाम, खेलकूद व अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों आदि में रुचि ले । ये सभी क्रियाकलाप उसके सर्वांगीण विकास हेतु आवश्यक होते हैं । खेलकूद व व्यायाम उन्हें शारीरिक रूप से स्वस्थ रखता है । शरीर में आवश्यक रक्त संचार की पूर्ति होने से उनकी मानसिक चेतना का भी विकास होता है. समाज के प्रति भी उसकी नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि समय मिलने पर वह ज्ञान का प्रकाश उन लोगों तक पहुँचाने का हर संभव प्रयास करे जो धनाभाव के कारण अज्ञानता के अंधकार में डूबे हुए हैं । किसी न किसी प्रकार से सामाजिक सेवा में जुड़े रहने पर उसका मनोबल बढ़ता है. सभी नागरिकों का राष्ट्र के प्रति कुछ दायित्व है । अपने राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रगान व अपने संविधान का सम्मान करना भी उसका एक कर्तव्य है । उसे कभी ऐसा कार्य नहीं करना चाहिए जो राष्ट्र की गरिमा के विरुद्‌ध हो । विद्‌यार्थी का यह कर्तव्य बनता है कि वह सदैव राष्ट्र विरोधी तत्वों से सचेत रहे तथा किसी भी प्रकार से राष्ट्रीय संपत्ति को क्षति न पहुँचाए. इस प्रकार हम देखते हैं कि विद्‌यार्थी को अपने जीवन में अनेक प्रकार के कर्तव्यों का निर्वाह करना पड़ता है । इन कर्तव्यों व दायित्वों से स्वयं को विमुख रख कर वह कभी भी सफलता के शिखर तक नहीं पहुँच सकता है । उसे सदैव अपनी दैनिक गतिविधियों पर निगरानी रखनी होगी तथा जीवन में जो कुछ शुभ है उन्हें अपनाने के अभ्यास करने होंगे |

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