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राष्ट्रीय एकता दिवस पर कविता – National Unity Day Poem in Hindi

राष्ट्रीय एकता दिवस पर कविता - National Unity Day Poem in Hindi

राष्ट्रीय एकता दिवस 2020 : राष्ट्रीय एकता दिवस हर वर्ष 31 अक्टूबर को मनाया जाता है | ये दिवस भारत की लौह पुरुष सरदार बल्लभभाई पटेल के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में मनाया जाता है | इस दिवस की शुरुआत २०१४ में माननीय नरेंद्र मोदी जी ने की थी | सरदार बल्लभभाई पटेल का हमेशा से यही सपना था की भारत में सभी लोग एकजुट होकर रहे | मोदी जी ने सरदार पटेल जी की प्रतिमा पर मालार्पण किया, साथ ही ‘रन फॉर यूनिटी’ मैराथन की शुरआत की थी | इस कार्यक्रम को शुरू करने का उद्देश्य देश के लिए अपने असाधारण कार्यों को याद करके महान व्यक्ति सरदार वल्लभभाई पटेल को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करना है। उन्होंने वास्तव में भारत को एकजुट रखने में कड़ी मेहनत की, सरदार वल्लभभाई पटेल को भारत के आयरन मैन के रूप में भी जाना जाता है जिन्होंने भारत को संयुक्त भारत (एक भारत) बनाने के लिए कड़ी मेहनत की। उन्होंने श्रद्धा भारत (सबसे पहला भारत) बनाने के लिए एकजुट होकर भारत के लोगों से मिलकर रहने का अनुरोध किया। सरदार पटेल का जन्म 31 अक्टूबर को 1875 में गुजरात के करमसंद में हुआ था | आज में आपके साथ इस पोस्ट राष्ट्रीय एकता दिवस पर कविता – National Unity Day Poem in Hindi के माध्यम से राष्ट्रीय एकता दिवस पर कविता साँझा कर रहा हु |

राष्ट्रीय एकता दिवस पर कविता

राष्ट्रीय एकता दिवस पर कविता 2020

सूखे पत्तों को जलाकर क्या बताना चाहते हो
हम में कितनी फूट है क्या यह जताना चाहते हो…

मीठी तुम्हारी जुबां पे मज़हब और जात पात है
शहद मिलiकर क्या ज़हर पिलाना चाहते हो…

बड़ी खामोश हूँ फिर भी हूँ बहुत बुलंद
में कलम की आवाज़ हूँ मुझ को दबाना चाहते हो…

तुम्हारे हर फरेब को कर दूंगा बेपर्दा
चढ़ा दो जितने भी नकाब चढ़ाना चाहते हो…

में अखबार हूँ इंक़लाब ला सकता हूँ
फखत कागज़ नहीं जो छुपाना चाहते हो…

हर तरह के फूलों से है ये चमन बना
खोद कर जड़ें क्या गुलिस्तां बसना चाहते हो…

टूटने नहीं दूंगा यह मुल्क मेरा घर है
लगालो ज़ोर जितना लगाना चाहते हो |

राष्ट्रीय एकता दिवस पर कविता

राष्ट्रीय एकता दिवस पर कविता

मैं नहीं तू, तू नहीं मैं
कब तक चलेगा ये मतभेद…

कैसे अनपढ़ हैं कहने वाले
जो देश को सांप्रदायिक सोच देते हैं…

फूट डालो और राज करो
कैसे वो ये नारा भुला बैठे हैं…

अंग्रेज हो या कोई हमने ही तो अवसर दिया
आपसी लड़ाई में हमने मातृभूमि को गँवा दिया…

आज भी उसी सोच के गुलाम हैं हम
खुद ही अपने देश के शत्रु बन रहे हैं हम…

फिर से कही मौका न दे बैठे
चलो सुलझाये और आज साथ आकर बैठे |

राष्ट्रीय एकता दिवस पर प्रेरित कविता

राष्ट्रीय एकता दिवस पर कविता

राष्ट्रीय एकता है ऐसी भावना
जो लोगों में पैदा करती है सदभावना…

हमारा भारत देश है राष्ट्रीय एकता की
जीती जागती मिशाल…

मेरा भारत है धर्मों का देश
फिर भी पिरोया हुआ राष्ट्रीय एकता…

के सूत्र में यह देश
मेरे देश भारत की शक्ति है…

इसकी राष्ट्रीय एकता की पहचान
जब भी मेरे देश की एकता है टूटी…

तभी वहां के लोगों की किस्मत है फूटी
अखंडता और शांति को बनाये रखना है जरूरी है…

इसीलिए देश के लोगो में राष्ट्रीय एकता है बहुत जरूरी
आईये सभी मिलकर एकता के सूत्र में बंध जाएं
गीले सिक्वे भुलाकर एक दूसरे के गले लग जाएं |

National Unity Day Poem in Hindi 2020

National Unity Day Poem in Hindi

इस राष्ट्र की एकता को हमेशा बनाए रखें
दिल में इस जज्बे को हमेशा जगाए रखें…

एकता के परिवेश में, जब वह रूप हमने पाया
अपना भारत देश ही, सोने की चिड़िया कहलाया…

भारत माता के सपूतों क्यों
एक दूसरे पर वार करते हो…

क्यों देश की अखंडता को, तार तार करते हो
राष्ट्र के महापुरुषों ने, एकता का प्रचार किया था…

सांप्रदायिक विचार का, बहिष्कार किया था
सब में प्रेम बांटना ही, अपनी पहचान होनी चाहिए…

इसी धारणा की सभी के मन में
ऊंची आवाज होनी चाहिए…

ईश्वर के बच्चों में भेद मत होने दीजिए
हर मजहब एक दिखें, सीख सब को दीजिए |

National Unity Day Beautiful Poem in Hindi

National Unity Day Poem in Hindi

भारत माता की बगिया में,
नये नये फिर फूल खिलायें…

मधुर सुगंध बहा कर इनकी,
सारा जग फिर से महकायें…

अपने घर के सारे झगड़े,
आपस में मिल कर सुलझायें…

शक्ति एकता में कितनी है,
यह रहस्य सबको समझायें…

सत्य न्याय के पाठ पर चलना,
निज जीवन आदर्श बनायें…

जीवन संघर्षों से लड़ना,
जन जन को फिर से सिखलायें…

ज्ञानदीप की ज्योति जला कर,
एक नया विश्वास जगायें…

मानव में फिर मानवता भर,
मानव को आदर्श बनायें…

हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई,
सब भाई भाई बन जायें…

अपने अपने भेद भूला कर,
आओ मिल कर देश बनायें |

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