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हिंदी दिवस पर निबंध और भाषण – Essay And Speech on Hindi Day in Hindi

हिंदी दिवस पर निबंध और भाषण - Essay And Speech on Hindi Day in Hindi

हिंदी दिवस : हिंदी दिवस राष्ट्रीय महत्व का दिन है। प्रत्येक वर्ष 14 सितंबर को मनाया जाता है, यह वह दिन है जिस दिन भारत की संविधान सभा द्वारा हिंदी को हमारी आधिकारिक भाषा के रूप में अपनाया गया था। बहुत संघर्ष के बाद हिंदी को हमारे देश की आधिकारिक भाषा घोषित किया गया।भारत में कई संस्कृतियों और धर्मों से संबंधित लोग शामिल हैं और इनमें से प्रत्येक की अपनी भाषा और बोली है। हिंदी भारत में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। 2001 में किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, 422 मिलियन से अधिक लोगों ने हमारे देश में हिंदी बोली और आज तक संख्या कई गुना बढ़ गई है। हिंदी भाषा विविधता में एकता का काम करती है। यह हमारे देशवासियों को एक साथ बांधती है और एकीकरण का प्रतीक है। आज में आपके साथ इस पोस्ट हिंदी दिवस पर निबंध और भाषण – Essay And Speech on Hindi Day in Hindi के माध्यम से विश्व ह्रदय दिवस पर निबंध और भाषण – World Heart Day Eassy And Speech in Hindi साँझा कर रहा हु |

हिंदी दिवस पर निबंध और भाषण - Essay And Speech on Hindi Day in Hindi

हिंदी दिवस पर निबंध

हिंदी शब्द का विश्लेषण

हिन्दी शब्द का सम्बन्ध शब्द सिन्धु से माना जाता है। और उसी आधार पर उसके आस-पास की भूमि को सिन्धु कहने लगे। यह सिन्धु शब्द ईरानी में जाकर हिन्दू, हिन्दी और फिर हिन्द हो गया। बाद में ईरानी धीरे-धीरे भारत के अधिक भागों से परिचित होने लगा और इस शब्द के अर्थ में विस्तार होता गया तथा हिन्द शब्द पूरे भारत का वाचक शब्द हो गया। इसी में ईरानी का ईक प्रत्यय लगने से (हिन्द ईक) हिन्दीक बना जिसका अर्थ है हिन्द का यूनानी शब्द इन्दिका या अंग्रेजी शब्द इण्डिया आदि इस हिन्दीक के ही विकसित रूप है हिन्दी भाषा के लिए इस शब्द का प्राचीनतम प्रयोग शरफुद्दीन यज+दी के जफरनामा(1424) में मिलता है।प्रोफ़ेसर महावीर सरन जैन ने अपने ” हिन्दी एवं उर्दू का अद्वैत ” शीर्षक आलेख में हिन्दी के विश्लेषण पर विचार करते हुए कहा है कि ईरान की प्राचीन भाषा अवेस्ता में ‘स’ ध्वनि नहीं बोली जाती थी। ‘स’ को ‘ह’ रूप में बोला जाता था। जैसे संस्कृत के ‘असुर’ शब्द को वहाँ ‘अहुर’ कहा जाता था। अफ़ग़ानिस्तान के बाद सिन्धु नदी के इस पार हिन्दुस्तान के पूरे इलाके को प्राचीन फ़ारसी साहित्य में भी ‘हिन्द’, ‘हिन्दुश’ के नामों से पुकारा गया है तथा यहाँ की किसी भी वस्तु, भाषा, विचार को ‘एडजेक्टिव’ के रूप में ‘हिन्दीक’ कहा गया है जिसका मतलब है ‘हिन्द का। यही ‘हिन्दीक शब्द अरबी से होता हुआ ग्रीक में ‘इन्दिके’, ‘इन्दिका’, लैटिन में ‘इन्दिया’ तथा अंग्रेज़ी में ‘इण्डिया’ बन गया। अरबी एवं फ़ारसी साहित्य में हिन्दी में बोली जाने वाली भाषाओं के लिए ‘ज़बान-ए-हिन्दी’, पद का उपयोग हुआ है। भारत आने के बाद मुसलमानों ने ज़बान-ए-हिन्दी’, ‘हिन्दी जुबान’ अथवा ‘हिन्दी का प्रयोग दिल्ली-आगरा के चारों ओर बोली

हिन्दी शब्द की विशेषताएँ

हिंदी भाषा के उज्ज्वल स्वरूप का भान कराने के लिए यह आवश्यक है कि उसकी गुणवत्ता, क्षमता, शिल्प-कौशल और सौंदर्य जैसे शब्दों का सही-सही आकलन किया जाए।

देश की अन्य भाषाओं में हिंदी सबसे अधिक व्यवस्थित भाषा है

वह सबसे अधिक सरल और सामान्य भाषा है।

वह एक मात्र ऐसी भाषा है जिसके अधिकतर नियम अपवादविहीन हैं

वह सच्चे अर्थों में विश्व भाषा बनने की पूर्व अधिकारी है।

हिन्दी लिखने के लिये प्रयुक्त देवनगरी लिपि अत्यन्त वैज्ञानिक है। और वह इसका अपूर्ण इस्तेमाल करते है |

हमारे देश में हिन्दी बोलने एवं समझने वाली जनता कम से कम पचास करोड़ से भी अधिक है।

हिन्दी आम जनता से जुड़ी भाषा है तथा आम जनता हिन्दी से जुड़ी हुई है।

हिन्दी को शब्दसंपदा एवं नवीन शब्द रचना सामर्थ्य विरासत में मिली है। वह देशी भाषाओं एवं अपनी बोलियों आदि से शब्द लेने में संकोच नहीं करती। अंग्रेजी के मूल शब्द लगभग 10000 हैं, जबकि हिन्दी
के मूल शब्दों की संख्या ढाई लाख से भी अधिक है।

भारत के स्वतंत्रता-संग्राम की वाहिका और वर्तमान में देशप्रेम का अमूर्त-वाहन हिन्दी के विकास में पहले साधु-संत एवं धार्मिक नेताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा। उसके बाद हिन्दी पत्रकारिता एवं स्वतंत्रता संग्राम से बहुत मदद मिली; फिर बंबइया फिल्मों से सहायता मिली और अब इलेक्ट्रॉनिक मीडिया(टीवी)के कारण हिन्दी समझने-बोलने वालों की संख्या में बहुत अधिक वृद्धि हुई है।

शुद्ध हिन्दी

इसके अलावा हिन्दी में कई शब्द अरबी, फ़ारसी, तुर्की, अंग्रेज़ी आदि से भी आये हैं। इन्हें विदेशी शब्द कह सकते हैं। जिस हिन्दी में अरबी, फ़ारसी और अंग्रेज़ी के शब्द लगभग पूरी तरह से हटा कर तत्सम शब्दों को ही प्रयोग में लाया जाता है, उसे “शुद्ध हिन्दी” कहते हैं।

हमारा अभिमान है भारत की शान है हिन्दी

भारत में अधिकतर बच्चे सर्वप्रथम हिन्दी में ही अपनी मां के प्यार भरे बोलों को सुनते हैं। हिन्दी हिन्दुस्तान की भाषा है. यह भाषा हमारे सम्मान, स्वाभिमान और गर्व करती है। हिन्दी ने हमें विश्व में एक नई पहचान दिलाई है। हिन्दी हिन्दुस्तान को बांधती है। कभी गांधीजी ने इसे जनमानस की भाषा कहा था तो इसी हिन्दी की खड़ी बोली को अमीर खुसरो ने अपनी भावनाओं को प्रस्तुत करने का माध्यम भी बनाया । हिन्दी से हजारों लेखकों ने अपनी कर्मभूमि बनाया, जिसे कई स्वतंत्रता सेनानियों ने भी देश की शान बताया उसे देश के संविधान में राजभाषा की ही उपाधि दी गई. तथा कथित राष्ट्रवादियों की वजह से हिन्दी को आज उसका वह सम्मान नहीं मिल सका जिसकी उसे जरूरत थी

हिन्दी बने राष्ट्रभाषा

जिस हिन्दी को संविधान में सिर्फ राजभाषा का दर्जा प्राप्त है उसे कभी गांधी जी ने खुद राष्ट्रभाषा बनाने की बात कही थी। सन 1918 में हिंदी साहित्य सम्मलेन की अध्यक्षता करते हुए गांधी जी ने कहा था कि हिंदी ही देश की राष्ट्रभाषा होनी चाहिए। लेकिन आजादी के बाद ना गांधीजी रहे ना उनका सपना सत्ता में बैठे और भाषा-जाति के नाम पर राजनीति करने वालों ने हिन्दी को राष्ट्रभाषा नहीं बनने दिया। पहली बार सही मायनों में हिन्दी की खड़ी बोली का इस्तेमाल अमीर खुसरों की रचनाओं में देखने को मिलता है। अमीर खुसरो ने हिन्दी को अपनी मात्रभाषा कहा था। इसके बाद हिन्दी का प्रसार मुगलों के साम्राज्य में ही हुआ। इसके अलावा खड़ीबोली के प्रचार-प्रसार में संत सम्प्रदाओं का भी विशेष योगदान रहा जिन्होंने इस जनमानस की बोली की क्षमता और ताकत को समझते हुए अपने ज्ञान को इसी भाषा में देना सही समझा।

भारतीय पुनर्जागरण के समय

श्रीराजा राममोहन राय, केशवचंद्र सेन और महर्षि दयानंद जैसे महान नेताओं ने हिन्दी की खड़ी बोली का महत्व समझते हुए इसका प्रसार किया और अपने अधिकतर कार्यों को इसी भाषा में पूरा किया। हिन्दी के लिए पिछली सदी कई दृष्टियों से महत्वपूर्ण है। इस सदी में हिन्दी गद्य का न केवल विकास हुआ, वरन भारतेंदु हरिश्चंद्र ने उसे मानक रूप प्रदान किया. खड़ी बोली को और भी प्रसार दिया महादेवी वर्मा, जयशंकर प्रसाद, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला और सुमित्रानंदन पंत जैसे रचनाकारों का योगदान रहा । आजादी की लड़ाई में हिन्दी ने विशेष भूमिका निभाई जहां एक ओर रविन्द्रनाथ टैगोर ने बांग्ला भाषा का ज्ञाता होते हुए भी हिन्दी को ही जनमानस की भाषा बताया तो वहीं देश के क्रांतिकारियों ने जनमानस से संपर्क साधने के लिए इसी भाषा का प्रयोग किया था |

हिन्दी दिवस

14 सितम्बर को एक बार फिर हिन्दी दिवस मनाया जा रहा है। इस अवसर पर सरकारी, अर्द्धसरकारी तथा निजी संस्थाओं में कहीं हिन्दी सप्ताह तो कही पखवाड़ा मनाया जायेगा। सभी जगह जो कार्यक्रम आयोजित होंगे उसमें निबंध, कहानी तथा कविता लेखन के साथ ही वादविवाद प्रतियोगितायें होंगी। कहीं परिचर्चा आयोजित होगी। भारत में हर कागज़ पर जब हिन्दी लिखा जायेगा, तभी हिन्दी दिवस का पावन लक्ष्य पूरा होगा

Speech on Hindi Day in Hindi

जैसा कि विदित है हम यहां पर हिन्दी दिवस मनाने आये हैं। आज के समय में हिन्दी को लेकर यह चिंताजनक बात हैं कि लोग इसके महत्व को भूल रहे हैं और इसके महत्व को जानते हुए भी इसे अनदेखा कर रहे हैं। लोगों को हिन्दी का महत्व समझना चाहिए। यह हमारे देश की अधिकारिक भाषा है। इस भाषा से ही हमारे देश का गौरव, संस्कृति और सम्मान है। इसके पीछे हमें एक अलग पहचान मिली हुई है, जो हमें और हमारे देश भारत को दुनिया में सबसे अलग बनाती है।

हमारे देश के संविधान सभा ने यह 14 सितम्बर को हिन्दी दिवस के रूप में अपनाया है। हमें इसका सम्मान करना चाहिए। आज के समय में हिन्दी भाषा को इतनी प्राथमिकता नहीं मिल पाती जितनी हिन्दी को मिलनी चाहिए। आज के समय में हिन्दी का प्रयोग बहुत कम होता जा रहा है। इसके पीछे कारण दूसरी भाषाओं का भारत देश में हावी होना। इन भाषाओं ने देश में इतना वर्चस्व कायम कर लिया है कि लोग हिन्दी को भूलते जा रहे हैं।

विश्व में ऐसे कई देश है, जहां पर हिन्दी को विशेष स्थान दिया जाता है और इसको वो सम्मान दिया जाता है जो हिन्दी को मिलना चाहिए। हिन्दी विश्व की चौथी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। फिर भी लोग इसके महत्व पर इतना ध्यान नहीं दे रहे हैं।आज के समय में सभी लोग अंग्रेजी की तरफ ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं। बहुत से जगह ऐसे हैं जहां पर अंग्रेजी को महत्वपूर्ण कर दिया गया है। फिर भी हिन्दी भारत में व्यापक बनी हुई है। भारत के कई राज्यों में इसे अधिकारिक रूप में अपनाया गया हैं। भारत का बिहार एकमात्र ऐसा राज्य है जिसने सबसे पहले हिन्दी को अपनी अधिकारिक भाषा के रूप में स्वीकार किया था। 2001 में जनसंख्या का आयोजन हुआ था। तब 422 लाख लोगों इसे अपनी मातृभाषा के रूप में उल्लेख किया था। भारत के उतर भाग में हिन्दी का सबसे ज्यादा प्रयोग किया जाता है।

अंत में मैं यही कहना चाहता हूं कि आज के समय में हिन्दी के महत्व को समझना चाहिए और सभी लोगों को इसके प्रति जगरूक करना चाहिए। हमें इसका सम्मान करना चाहिए और इस भाषा को एक नये स्तर तक पहुंचाने का प्रयास निरंतर करना चाहिए।